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वैदिक कुंडली में क्या होता है?

आपकी जन्म कुंडली में बारह भाव होते हैं, प्रत्येक भाव जीवन के एक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है — पहला भाव स्वयं और स्वास्थ्य, चौथा भाव माता और गृह, सातवां भाव विवाह, दसवां भाव कर्म और प्रतिष्ठा। नौ ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) इन भावों में अपनी स्थिति के अनुसार जीवन की घटनाओं और प्रवृत्तियों को आकार देते हैं।

दशा क्या है?

विमशोत्तरी दशा प्रणाली 120 वर्षों का चक्र है, जिसमें प्रत्येक ग्रह की महादशा कुछ निश्चित वर्षों के लिए चलती है — राहु 18, गुरु 16, शनि 19 वर्ष। यह जीवन की घटनाओं के सटीक समय को बताती है। आपकी कुंडली में महादशा, अंतर्दशा, और प्रत्यंतर्दशा के साथ पूरा 120-वर्ष का क्रम दिखाई देगा।

लग्न (Ascendant) क्यों महत्वपूर्ण है?

लग्न आपकी कुंडली का प्रथम भाव है — वह राशि जो आपके जन्म के समय पूर्व क्षितिज पर उदित हो रही थी। यह आपके शरीर, स्वभाव, और जीवन की दिशा को निर्धारित करती है। राशिफल पढ़ते समय अपनी चंद्र राशि का उपयोग करें, सूर्य राशि का नहीं।

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